डेट ई मीडिया (मुंबई)
दिनांक: 19 मई, 2026
उस्ताद गुलाम अब्बास के नए गीत “मुझ में तू” का भव्य लोकार्पण: ध्यानाचार्य डॉ. अजय जैन विशेष अतिथि के रूप में हुए शामिल
मुंबई: मायानगरी के प्रतिष्ठित जुहू क्लब मिलेनियम सभागार में बीते दिन संगीत जगत की कई अजीम शख्सियतों की मौजूदगी में मशहूर सूफी व शास्त्रीय गायक उस्ताद गुलाम अब्बास के नए गीत “मुझ में तू” का भव्य लोकार्पण समारोह संपन्न हुआ। इस खास मौके पर प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु ध्यानाचार्य डॉ. अजय जैन ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की।
सभागार में ध्यानाचार्य डॉ. अजय जैन के पहुंचते ही उस्ताद गुलाम अब्बास ने बेहद गर्मजोशी के साथ उन्हें गले लगाकर उनका आत्मीय स्वागत किया। वहीं, मंच पर उस्ताद गुलाम अब्बास के साथ मौजूद देश की जानी-मानी गायिका जसविंदर नरूला ने भी ध्यानाचार्य डॉ. अजय जैन का पूरे सम्मान के साथ स्वागत और अभिनंदन किया।
“रामपुर सहस्वान घराने के वर्तमान सूत्रधार हैं उस्ताद गुलाम अब्बास” – ध्यानाचार्य
लोकार्पण के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए ध्यानाचार्य डॉ. अजय जैन ने उस्ताद गुलाम अब्बास की गायकी और उनके हुनर की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा:
“उस्ताद गुलाम अब्बास आज के समय के सबसे बेहतरीन और मुकम्मल कलाकारों में से एक हैं। वे रामपुर सहस्वान घराने की समृद्ध और ऐतिहासिक परंपरा के वर्तमान सूत्रधार हैं, जो अपनी विरासत को पूरी शिद्दत से आगे बढ़ा रहे हैं।”
नए गीत “मुझ में तू” की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए ध्यानाचार्य ने संगीत के आध्यात्मिक पहलू पर रोशनी डाली और कहा:
“एक दौर ऐसा आता है जब संगीतकार के भीतर तो ईश्वर वास करता ही है, साथ ही ईश्वर और अल्लाह भी उस सच्चे फनकार को अपने भीतर बैठा लेते हैं। यह गीत सीधे रूह को छूता है।”
उन्होंने उस्ताद गुलाम अब्बास के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें भारतीय संगीत जगत का एक ‘अमूल्य नगीना’ करार दिया।
संगीत जगत के दिग्गजों का लगा जमावड़ा
इस गौरवमयी शाम को और भी यादगार बनाने के लिए संगीत की दुनिया के कई बड़े दिग्गज एक ही छत के नीचे नजर आए। कार्यक्रम में उस्ताद गुलाम अब्बास और जसविंदर नरूला के अलावा: पद्मश्री हरिहरण (दिग्गज गायक), अनूप जलोटा (भजन सम्राट), चंदन दास (मशहूर गजल गायक), अभिजीत भट्टाचार्य (प्रसिद्ध पाशर्व गायक), ललित सेन (संगीतकार), घनश्याम (संगीतकार) और मन (संगीतकार, गायक और गीतकार) तथा रामपुर सहस्वान घराने के तमाम सम्मानित कलाकार और मूवी मैजिक के राजेश नेगी और हंसा सोलंकी भी उपस्थित रहे ।
ध्यानाचार्य ने इस कार्यक्रम को भारतीय ‘राष्ट्रीय चरित्र’ बताते हुए कहा कि मुंबई के जुहू क्लब मिलेनियम में उस्ताद गुलाम अब्बास के गीत “मुझ में तू” के लोकार्पण की यह घटना मात्र एक संगीत समारोह नहीं है, बल्कि यह भारतीय ‘राष्ट्रीय चरित्र’ (National Character) और उसकी मूल आत्मा का एक जीवंत दस्तावेज है ।
ध्यानाचार्य के अनुससर इस समाचार के आलोक में हमारे राष्ट्रीय चरित्र के निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं को समझा जा सकता है:
‘विविधता में एकता’ और सांप्रदायिक सौहार्द
हमारा राष्ट्रीय चरित्र समावेशन (Inclusivity) पर टिका है । मंच पर सूफी व शास्त्रीय गायक उस्ताद गुलाम अब्बास, आध्यात्मिक गुरु ध्यानाचार्य डॉ. अजय जैन और मशहूर गायिका जसविंदर नरूला का एक साथ आना भारत की साझा संस्कृति (गंगा-जमुनी तहजीब) का प्रतीक है । उस्ताद गुलाम अब्बास द्वारा डॉ. अजय जैन को गर्मजोशी से गले लगाना यह दिखाता है कि भारत में कला और इंसानियत का धर्म, संप्रदाय की दीवारों से कहीं ऊपर है ।
- संगीत और कला के जरिए अध्यात्म का मिलन
भारतीय चरित्र में कला केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि ईश्वर तक पहुँचने का माध्यम (साधना) मानी गई है । ध्यानाचार्य डॉ. अजय जैन का यह कथन कि “ईश्वर और अल्लाह भी उस सच्चे फनकार को अपने भीतर बैठा लेते हैं”, इस बात की पुष्टि करता है । यह बयान हमारे उस राष्ट्रीय दर्शन को दर्शाता है जहाँ ‘ईश्वर’ और ‘अल्लाह’ में कोई भेद नहीं देखा जाता और संगीत को आत्मा की रूह से जोड़ा जाता है ।
- ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ और विरासत (Gharana System) का सम्मान
भारत का राष्ट्रीय चरित्र अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने और उसे अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए जाना जाता है । उस्ताद गुलाम अब्बास को ‘रामपुर सहस्वान घराने’ का वर्तमान सूत्रधार बताना और उनके हुनर की सराहना करना यह दिखाता है कि आधुनिकता के इस दौर में भी भारत अपनी सदियों पुरानी शास्त्रीय परंपराओं और घरानों के प्रति अत्यंत संवेदनशील और गौरवमयी दृष्टिकोण रखता है ।
- सहिष्णुता, परस्पर सम्मान और कलात्मक एकजुटता
इस कार्यक्रम में हरिहरन, अनूप जलोटा, चंदन दास और अभिजीत भट्टाचार्य जैसे संगीत के अलग-अलग विधाओं (भजन, गजल, सूफी, बॉलीवुड) के दिग्गजों का शामिल होना हमारे राष्ट्रीय चरित्र के ‘परस्पर सम्मान’ (Mutual Respect) वाले गुण को उजागर करता है। यहाँ प्रतिस्पर्धा पर कलाकार की प्रतिभा और भाईचारा हावी दिखता है ।
यह समाचार इस बात का सशक्त प्रमाण है कि भारत का राष्ट्रीय चरित्र ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘सर्वधर्म सम्भाव’ की नींव पर खड़ा है। जहाँ सुर, रूह और अध्यात्म मिलकर एक ऐसा ताना-बाना बुनते हैं, जिसमें मजहब की दूरियां मिट जाती हैं और केवल ‘भारतीयता’ शेष रह जाती है ।
सभी गणमान्य अतिथियों ने उस्ताद गुलाम अब्बास के इस नए सूफियाना सफर और नए गीत “मुझ में तू” की सफलता के लिए उन्हें दिल से बधाई और शुभकामनाएं दीं। सुरों से सजी यह शाम मुंबई के संगीत प्रेमियों के लिए लंबे समय तक याद रखी जाएगी ।